Heart Care in Winters
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खतरनाक साबित हो सकता है सर्दियों का मौसम | Heart Care in Winters

बरसात के बाद अब धीरे-धीरे सर्दियों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। ठंड में वैसे तो कई प्रकार की बीमारियां बढ़ने लगती हैं परंतु ज्यादातर हार्ट अटैक का खतरा इस मौसम में बढ़ जाता है। एक शोध के मुताबिक ठंड का मौसम बीपी और शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव होने का प्रमुख कारण होता है। ऐसे में दिल के दौरे और भी गंभीर तरह से आ सकते हैं। इसलिए दिल के मरीजों को इस समय अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। 

एक अमेरिकन रिपोर्ट के अनुसार हृदय रोग से मरने वाले लोगों की मौत की दर 25 दिसंबर से 5 जनवरी के बीच अधिक तेजी से बढ़ने लगती है इसका एक मुख्य कारण सर्दी का मौसम भी हो सकता है।

डॉक्टर के अनुसार ठंड के दिनों में दिन छोटे तथा रातें बड़ी हो जाती हैं। दिन के घंटों में होने वाले इस बदलाव के कारण शरीर के कॉर्टिसोल हॉर्मोन का स्तर व संतुलन बिगड़ने लगता है, जिससे हृदय पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। तापमान कम होने के कारण धमनियां भी कठोर हो जाती हैं तथा रक्त का बहना रुक जाता है। इसके कारण दिल को ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं हो पाती तथा दिल का दौरा पड़ने के ज्यादा अवसर होते हैं। Heart Care in Winters 

इसके लिए दिल की बीमारी वाले  लोगों को अधिक जागरूक रहने की आवश्यकता होती है। 

एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल के दौरे, स्ट्रोक तथा दिल की बीमारी से संबंधित परेशानियां ठंड में सुबह के समय ही अधिक होती हैं क्योंकि ठंड के मौसम में शरीर में गर्मी बनाए रखने के लिए काम करना पड़ता है तथा दिल को ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत महसूस होती है परंतु ऑक्सीजन कम मिलने के कारण दौरे पड़ने का खतरा बढ़ जाता है और यह खतरनाक साबित हो सकता है।

आइये इस लेख के माध्यम से यह जानते हैं कि सर्दियों के मौसम में किन गलतियों को करने से बचना चाहिए।


ठंड में रहना


ह्रदय रोगियों के लिए ठंड में रहना तथा ज्यादा ठंड में घूमना-फिरना खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि ठंड की वजह से धमनियां या हृदय की नालियां सिकुड़ जाती हैं तथा शरीर को गर्म रखने के लिए ज्यादा ब्लड सप्लाई की आवश्यकता होती है। यह दिल के लिए मुश्किल कार्य होता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ठंड से बचाव करना चाहिए।


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गलत खान-पान है कारण 


सर्दियों में कई और तरह की बीमारियां भी पैदा होती हैं जिसका मुख्य कारण लोगों द्वारा अपनाए जाने वाला खानपान है। यदि लोगों द्वारा यह खानपान सही किया जाए तो इससे काफी सारी बीमारियां बहुत हद तक दूर हो सकती हैं। इसके लिए भारी तेल मसाले वाला भोजन नहीं करना चाहिए तथा सुबह उठकर गुनगुना पानी पीना चाहिए। इसमें एक चम्मच शहद तथा नींबू मिलाकर पीने से एसिडिटी कम होती है। यदि शरीर में एसिडिटी हो जाती है तो इससे भी हार्ट में क्लॉट बनने का खतरा रहता है। ठंड के मौसम में लोग कई बार खाते रहते हैं जिससे उनका वजन भी बढ़ जाता है। वजन बढ़ना दिल की बीमारी के लिए खतरा पैदा करता है, इसीलिए तला भुना खाने से बचना चाहिए तथा अपने खानपान में फल तथा हरी सब्जियों को शामिल करना बीमारियों से दूर रहने का एक बहुत अच्छा विकल्प है।


दवाओं की कम डोज लेना


हम में से बहुत ही कम लोग यह जानते हैं कि गर्मी के मौसम की बजाय सर्दी में ब्लड प्रेशर अधिक बढ़ता है तथा इसके लिए अधिक दवाइयों की जरूरत होती है। परंतु डॉक्टर के परामर्श से लोग अपनी दवाइयां कम करवा लेते हैं जो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इस मौसम में हार्ट की दिक्कतें ज्यादा होने लगती हैं।


गलत जीवन शैली अपनाना


आजकल की इस व्यस्त दिनचर्या में लोग गलत जीवनशैली को अपना रहे हैं। सर्दियों में कुछ लोग अचानक से ही कसरत तथा व्यायाम शुरू कर देते हैं जो कि उन्होंने पहले नहीं किया होता। अचानक आए इस बदलाव को दिल स्वीकार नहीं कर पाता तथा इसका असर शरीर पर पड़ने लगता है, इसलिए दिनचर्या में कोई भी अचानक किया जाने वाला बदलाव हृदय के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यदि आपको कोई भी बदलाव करना है तो उसे धीरे-धीरे करने की कोशिश करनी चाहिए।

 

ठंड के मौसम में इन सावधानियों बरतें


इन चीजों से बनाएं दूरी


दिल की बीमारी वाले लोगों को भी मक्खन तेल तथा मसाले वाले खाने से दूर रहना चाहिए। शराब तथा सिगरेट से भी परहेज करना चाहिए तथा बिस्किट और नमकीन जैसे पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।


खाने में शामिल करें यह चीजें


सर्दी के मौसम में अपने खानपान में हरी सब्जियां और ज्वार, बाजरा, दलिया आदि चीजें शामिल करनी चाहिए तथा विटामिन सी से भरपूर चीजें लेना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इससे ब्लड का सर्कुलेशन अच्छा रहता है।


नियमित करें व्यायाम का समय


सर्दियों में 35 से 40 मिनट का व्यायाम करना चाहिए या तीन से 4 किलोमीटर तक वॉक करना भी फायदेमंद होता है। परंतु व्यायाम नियमित करने से ही लाभ मिलता है। अचानक कोई भी चीज शुरू करनी हो तो उसे धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या में शामिल करें। डॉक्टर की देखरेख में ही दिल के मरीजों को व्यायाम करना चाहिए। यदि आपका शरीर व्यायाम करने के लिए तैयार ना हो तो उसके लिए जबरदस्ती बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए इससे दिल तथा शरीर को नुकसान पहुंच सकता है।


इन अन्य बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है


  • सर्दियों में गुनगुने पानी से नहाना ही बेहतर है। इससे शरीर में गर्मी बनी रहती है।
  • सर्दी के मौसम में पानी पीने का मन कम ही करता है परंतु फिर भी थोड़े समय के अंतराल पर पानी पीते रहें। 
  • यदि ठंड अधिक हो तो बाहर घूमने ना जाएं दिल के रोगियों के लिए यह नुकसान पहुँचा सकता है।
  • अर्जुन छाल का काढ़ा बनाकर पीना फायदेमंद होता है।
  • 7 से 8 घंटे की नींद लें तथा तनाव से बचें।
  • लौकी का जूस काली मिर्च के साथ पीना दिल की बीमारी में लाभकारी सिद्ध होता है। इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए।


यदि सुबह के समय आपका शरीर मेहनत वाला काम करने के लिए तैयार नहीं है तो अपनी कार्यरूपरेखा में बदलाव करते हुए धीरे-धीरे नई शुरुआत करें।

डिस्क्लेमर: यह टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं, इन्हे किसी डॉक्टर या फिर स्वस्थ्य स्पेशलिस्ट की सलाह के तौर पर न लें, बिमारी या किसी संक्रमण की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से ही अपना इलाज करवाएं।

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