एक कहानी जो बयां करती है मरने से पहले किसी व्यक्ति के मन में चल रही उधेड़बुन को, वह कहां तक सोच सकता है किस प्रकार से उसके विचार उसके मन में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से बिजली की तरह कौंधते हुए भीतर ही भीतर उसे झकझोर कर रख देते हैं। और पढ़ें
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